आज ही के दिन 12 अगस्त 1936 मे मेजर ध्यानचंद की कुछ यादें

मेजर ध्यानचंद कुछ यादें कुछ बातें- बर्लिन ओलंपिक 12 अगस्त 1936 सेमी फ़ाइनल में भारत का मुकाबला फ्रांस से -ए आई एस दारा का बर्लिन  ओलंपिक में   अपना पहला मैच - बड़ी जीत के साथ भारतीय हॉकी टीम का फाइनल में प्रवेश - बर्लिन   स्थित मस्जिद कमेटी द्वारा भारतीय हॉकी टीम का  आत्मीय  स्वागत- फ्रांस ग्रुप सी में 3 अंकों के साथ अपने ग्रुप में अंक तालिका में दूसरे नंबर पर है और इसी वजह से सेमीफाइनल में फ्रांस की टीम का मुकाबला ग्रुप ए की सर्वोच्च टीम भारत के साथ 12 अगस्त 1936 को  शाम 4:30 बजे हॉकी स्टेडियम में शुरू हुआ। इस मैच में मौसम सूखा हुआ है आसमान खुला है और बर्लिन का तापमान 23 से 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास है खेलने के लिए बहुत ही अनुकूल मौसम इस समय बना हुआ है  । इस मैच में अंपायर  रेनी ब्रग जर्मनी एवं एडी  बुये बेल्जियम से है। भारतीय टीम में कप्तान ध्यानचंद, रूप सिंह, मोहम्मद जफर, शाहाबाद शहाबुद्दीन, मसूद, गुड्सर कूलियन, मोहम्मद हुसैन, टॉप सेल, गलबर्डि , ऐलन और दारा शामिल है। फ्रांस की टीम से तिक्सियर ,चेवलर , इंबौलत ,गर्वरिएयूएक्स, ग्रिम्मोंपतज , वर्गर,सर्टरियस, गोनात ,गोयूबर्त,सोले, वोलोग्र मैदान में भारतीय हॉकी टीम का मुकाबला करने के लिए उतरे हैं। प्रारंभिक मुकाबलों में भारतीय हॉकी टीम विरोधी टीमों का मुकाबला करने के लिए बेस्ट अटैक इस द बेस्ट डिफेंस  डब्लयू  फॉर्मेशन की नीति पर खेलते हुए पिछले खेले गए मैचों में जीत हासिल करते चली आ रही है  इसलिए यूरोपियन  टीम फ्रांस के खिलाफ भी यही रणनीति अपनाने का तरीका और अमल करने के लिए सभी टीम के खिलाड़ियों को कोच जगन्नाथ राव और कप्तान ध्यानचंद द्वारा कहां गया। एआईएस  दारा इस ओलंपिक खेल में अपना पहला मैच खेल रहे थे इसलिए उन्हें कोच जगन्नाथ राव और कप्तान ध्यानचंद ने  भारतीय हॉकी के सभी खिलाड़ियों की विशेषता और कमियों  से अवगत कराया गया क्योंकि एआईएस  दारा अनुभवी, खेल में दक्षता लिए  खिलाड़ी हैं इसलिए वे अपने पहले ही मुकाबले से टीम की लय में आ गए ।  भारतीय हॉकी टीम विरोधी टीमों के विरुद्ध बड़ी  जीतो को हासिल करने के  बाद बुलंद हौसलों की उड़ान भरते हुए फ्रांस की हॉकी टीम पर मैच प्रारंभ होने के साथ  अपनी बेस्ट अटैक इज द बेस्ट डिफेंस की नीति के साथ फ्रांस की हॉकी टीम पर टूट पड़ी जिसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय हॉकी टीम ने मैच के 6  वे  मिनट में ही अपना पहला गोल फ्रांस पर कर दिया जिसके बाद मध्यांतर तक भारत ने तीन गोल और कर  दिए। भारतीय हॉकी टीम मध्यांतर तक 4 -0 से आगे है ।मध्यांतर के बाद भारत ने 5 वे मिनट में एक गोल और कर दिया इसके बाद नियमित अंतराल में भारतीय हॉकी टीम ने 5 और गोल कर दिए जिसमें एक गोल पेनल्टी कार्नर से भी बनाया गया। भारतीय हॉकी टीम की ओर से एआईएस दारा ने पहले ही मैच में अपनी उपस्थिति को सही साबित करते हुए दो गोल दागे, साहबान शहाबुद्दीन और टॉप सेल ने एक-एक गोल किए मेजर ध्यानचंद के छोटे भाई रूप सिंह ने दो गोल और कप्तान ध्यानचंद ने  चार गोल किए और इस प्रकार भारत ने सेमीफाइनल में फ्रांस को 10 - 0 से रौंदते हुए   धमाकेदार अंदाज में बर्लिन ओलंपिक के  फाइनल मे प्रवेश  कर लिया। भारतीय हॉकी टीम सेमीफाइनल तक अपने विरोधी टीमों के खिलाफ 30 गोल  कर चुकी है और उसके खिलाफ अभी तक एक भी गोल नहीं हुआ है। इस मैच को देखने के लिए बर्लिन ओलंपिक स्टेडियम में भारी  भीड़ पहुंची थी  क्योंकि उस समय तक जर्मन मीडिया वह जर्मन दर्शक जिसमें बड़ी संख्या में भारतीय दर्शक भी शामिल हैं मेजर ध्यानचंद और रूप सिंह की जादुई हॉकी के दीवाने हो चुके थे जिसकी वजह से जर्मन नागरिक और  और भारतीय दर्शक भारतीय हॉकी टीम के मैच को देखने के लिए हॉकी स्टेडियम में चुंबक की भांति खिंचे चले आ रहे थे। भारतीय हॉकी टीम प्रबंधन और कप्तान ध्यानचंद द्वारा ए आई एस दारा को विशेष तौर पर बर्लिन बुलाने का निर्णय सही साबित हुआ क्योंकि उनके आने के बाद भारत की राइट विंग कहीं अधिक आक्रमक हो उठी। भारत ने जिस बड़े अंतर से सेमीफाइनल में फ्रांस को रौंदा उसने फाइनल में पहुंचने वाली घरेलू जर्मन टीम के खेमे में खलबली और सनसनी फैला दी की फाइनल मैच में किस प्रकार भारतीयों का मुकाबला किया जाएगा। फ्रांस से मुकाबला जीतने के बाद भारतीय हॉकी टीम को बर्लिन स्थित मस्जिद कमेटी द्वारा चाय पर बुलाया गया जहां पर उनका आत्मीय स्वागत किया गया जो अपने आप में बड़ी और ऐतिहासिक घटना है यह इसलिए हुआ क्योंकि भारतीय हॉकी टीम अपने अंदर सारे धर्मों को समाए अलग-अलग भाषाओं को बोलने वाले अलग-अलग प्रांतों के खिलाड़ी होने के बावजूद एक राष्ट्र के रूप में ओलंपिक खेलों में भारत के लिए खेलने उतरे और भारतीय हॉकी टीम की खूबसूरती कि वह एक सूत्र में मेजर ध्यानचंद के नेतृत्व में एक माला के  मोतियों में पीरोई बंधी मजबूत भारतीयता की भावना से प्रेरित  टीम  है जो अपना सर्वोच्च  और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बर्लिन ओलंपिक में  कर रही हैं। आज भारतीय हॉकी टीम के बर्लिन ओलंपिक में लगातार तीसरी बार फाइनल मे पहुंचने का दिन है। ओलंपिक खेलों में भारत अपने स्वर्णिम युग का तीसरा स्वर्ण पदक हैट्रिक लगाने के लिए तत्पर और आतुर है। भारतीय हॉकी टीम का फाइनल में मुकाबला तानाशाह हिटलर के देश जर्मनी से   ओलंपिक कमेटी की अधिकारिक समय सारणी के अनुसार 14 अगस्त को  शाम 4.30 बजे खेला जाना है। तो आइए हम सब देशवासी भारतीय हॉकी टीम को फाइनल 
 में पहुंचने की बधाइयां देते हैं और इस दुनिया का  इस सदी के सबसे   बड़े मुकाबलेे भारत जर्मनी हॉकी फाइनल मैच के लिए शुभकामनाएं देते हैं साथ ही मेजर ध्यानचंद और उनकी हॉकी टीम को नमन करते हैं याद करते हैं कि आज उनके त्याग ,मेहनत संघर्ष के कारण  हमें जो स्वर्णिम  पल  मिले है और जिसे पाकर हम सभी भारतवासी गौरवान्वित हैं। 
(सुनील कुमार यादव
हेमचंद्र दुबे)

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